Hilsa News: नालंदा जिले के हिलसा डिवीजन (Hilsa PHED Division) में रहने वाले ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। गर्मी के दिनों में अक्सर भूजल स्तर (Groundwater level) नीचे चला जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। इसी के तहत, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने पेयजल संकट को हमेशा के लिए दूर करने का एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है।
विभाग यहां ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 28 लाख रुपये (27,96,000 रुपये) की लागत से 30 नए और हाईटेक चापाकल (Tube Wells) लगाने जा रहा है। इसके लिए विभाग ने आधिकारिक तौर पर टेंडर (NIT- 06/2026-27) जारी कर दिया है।
Hilsa News: 48 मीटर गहराई से मिलेगा शुद्ध पानी
अक्सर देखा जाता है कि पुराने चापाकलों के पास पानी जमा हो जाता है, जिससे कीचड़, गंदगी और मच्छरों (डेंगू-मलेरिया) का खतरा बढ़ जाता है। इस बार विभाग जो 30 नए चापाकल लगाने जा रहा है, वे पूरी तरह से यूनिसेफ (UNICEF) के विशेष डिजाइन पर आधारित होंगे।
क्या है यूनिसेफ मॉडल की खासियत?
इस मॉडल के तहत हर चापाकल के पास पानी की निकासी के लिए एक पक्की नाली और गोल चबूतरा (P.C.C Platform) बनाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि व्यर्थ बहने वाले पानी को सोखने के लिए 1 मीटर चौड़ा और 2 मीटर गहरा ‘सोकपिट’ (Soakpit) बनाया जाएगा। इससे न सिर्फ गंदगी दूर होगी, बल्कि जमीन के अंदर का ‘वाटर लेवल’ भी रिचार्ज होता रहेगा।
28 लाख के इस महा-टेंडर में क्या-क्या है शामिल?
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा जारी तकनीकी जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता का खास ख्याल रखा गया है:
- गहराई: हर बोरिंग 125mm चौड़ी और 48 मीटर (लगभग 150 फीट से ज्यादा) गहरी होगी। इससे गर्मी के दिनों में वाटर लेवल नीचे जाने पर भी पानी सूखने की समस्या नहीं आएगी।
- मजबूत हैंडपंप: इसमें उच्च गुणवत्ता वाले और लंबे समय तक चलने वाले ‘I.M-II (इंडिया मार्का)’ हैंडपंप लगाए जाएंगे।
27 जून तक टेंडर भरने की आखिरी तारीख
हिलसा PHED के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) बालमुकुंद कुमार द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, 28 लाख के इस जन-कल्याणकारी प्रोजेक्ट के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इच्छुक एजेंसियां और ठेकेदार 27 जून 2026 (शाम 4:00 बजे तक) अपना टेंडर ऑनलाइन डाल सकते हैं। उसी दिन शाम 5:00 बजे तकनीकी बिड (Bid) खोली जाएगी। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही हिलसा डिवीजन के 30 अलग-अलग स्थानों पर इन चापाकलों को लगाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा, जिससे हजारों ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नसीब होगा।