बिहार में पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुके राजगीर में अब सैलानियों को कंक्रीट के होटलों के बजाय सीधे प्रकृति की गोद में ठहरने का मौका मिलेगा। शहर के शोर-शराबे और प्रदूषण से दूर, राजगीर के घने जंगलों के बीच सूबे का पहला ‘इको-रिसॉर्ट’ (Rajgir Eco Resort) बनने जा रहा है। वन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पर्यटकों को बिल्कुल ‘अमेजॉन के जंगलों’ (Amazon Forest) में बने कॉटेज जैसा रोमांच और सुकून मिलेगा।
Rajgir Eco Resort में होगा 96 कमरों वाला ‘अमेजॉन’ कॉटेज
यह इको रिसॉर्ट पारंपरिक होटलों से बिल्कुल अलग होगा। इसे 5 से 7 एकड़ के विशाल कैंपस में विकसित किया जा रहा है। इसमें एकमंजिला कुटियां (Cottages) बनाई जाएंगी, जिनका बाहरी ढांचा जंगल के प्राकृतिक माहौल से मेल खाएगा। इस रिसॉर्ट में एक साथ 200 पर्यटकों और 37 कर्मचारियों के ठहरने की व्यवस्था होगी। वन विभाग के अनुसार, रिसॉर्ट में 8 सूट, 8 फर्स्ट क्लास, 40 एग्जीक्यूटिव और 40 डबल बेड वाले कुल 96 कमरे बनाए जाएंगे।
- सूट (Suite): 8 कमरे
- फर्स्ट क्लास (First Class): 8 कमरे
- एग्जीक्यूटिव (Executive): 40 कमरे
- डबल बेड (Double Bed): 40 कमरे
प्रकृति के बीच लग्जरी और सुकून
इस ‘राजगीर इको रिसॉर्ट’ की सबसे बड़ी खासियत इसका शांत और रहस्यमयी माहौल होगा। यहां रुकने वाले पर्यटकों की सुबह पेड़ों से छनकर आती धूप और पक्षियों की चहचहाहट के साथ होगी। रात के सन्नाटे में झींगुरों की आवाज और पास बहती जलधारा एक जादुई अहसास कराएगी। वन विभाग ने इसके लिए जगह की तलाश पूरी कर ली है और टेंडर भी जल्द जारी होने वाला है।
सफारी पर्यटकों की दूर होगी टेंशन;
राजगीर में जू-सफारी (Zoo Safari) और नेचर सफारी (Nature Safari) शुरू होने के बाद पर्यटकों की भीड़ काफी बढ़ गई है। जिला वन पदाधिकारी (DFO) राजकुमार मनमोहन ने बताया, “सफारी का लुत्फ उठाने आने वाले पर्यटकों को ठहरने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए ही इस इको रिसॉर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की कोशिशें जारी हैं।”
वहीं, पर्यटन विशेषज्ञ कौलेश कुमार का कहना है कि यह परियोजना अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर की दूरगामी सोच का नतीजा है। इससे राजगीर में पर्यटकों के रुकने का समय (Night Halt) बढ़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे और बिहार में ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को नई उड़ान मिलेगी।