खतरे में भोले बाबा का 5 हजार साल पुराना मंदिर: राजगीर के ऐतिहासिक बाबा सिद्धनाथ सोमनाथ मंदिर की ढहने लगी हैं दीवारें

नालंदा | राजगीर के ऐतिहासिक बाबा सिद्धनाथ सोमनाथ महादेव मंदिर खतरे में है। लगभग 5 हजार साल पुराने इस मंदिर की दीवारें अब ढहने लगी हैं। इस मंदिर में छत और दीवार तो है, लेकिन दरवाजा नहीं है। इसी कारण बाबा का पट हमेशा खुला ही रहता है। अब स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि इसकी दीवारें दरकने लगी हैं। मंदिर के चारों ओर 50 इंच मोटी दीवार और 12 सिद्ध स्तंभ हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे अपने अधीन रखा है, लेकिन आज तक मंदिर को सहेजने के प्रयास नहीं किया। कहने को एक छोटा सा बोर्ड लगा दिया गया है। जिसमें मंदिर के बारे में जानकारी अंकित है। नतीजतन, मंदिर के अस्तित्व पर घोर खतरा मंडरा रहा है।

सावन की पहली सोमवारी को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने बाबा के मंदिर के जीर्णोद्धार की सरकार से गुहार लगाई। हाथ में बैनर पोस्टर लिए लोगों ने कहना था कि राजगीर में विभिन्न धर्मावलंबियों के धार्मिक केंद्रों को सरकार संरक्षित करने में लगी है। विभिन्न धार्मिक संस्थानों के विकास के लिए सरकार कार्य कर रही है, लेकिन इस मंदिर पर उनकी नजर नहीं पड़ती। अखिल भारतीय जरासंध अखाड़ा महासभा के अध्यक्ष श्याम किशोर भारती ने सरकार से कहा कि हमलोग पिछले 2 साल से सरकारी की मंदिर के विकास कार्य के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार की नजर इस मंदिर पर आज तक नहीं पड़ी है।

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ऐसी मान्यता है कि ऐतिहासिक महत्व के इस सिद्धनाथ मन्दिर में सच्चे मन से माँगी गयी हरेक मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि इस मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पूरे भारत से लोग आते हैं। पुरातात्विक, धार्मिक और महाभारत कालीन इस प्राचीन मंदिर की दीवारें अब ढहने लगी है लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नही है। इस मंदिर के विकास के लिए वर्ष 2018 में अखिल भारतीय जरासंध अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम किशोर भारती द्वारा पीएमओ प्रधानमंत्री कार्यालय में लोक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी तब पीएमओ द्वारा सम्बंधित विभाग के साथ बिहार के पर्यटन विभाग को भी दिशा निर्देश जारी किए गए थे।

सरकार के निर्देश के आलोक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पटना अधीक्षक कार्यालय के द्वारा जांच टीम राजगीर आयी थी और मन्दिर के संरक्षण,सौंदर्यीकरण एवँ विकास के लिए प्राक्कलन तैयार कर विभाग को पत्र जारी किया गया था। जांच टीम को गए हुए दो वर्ष बीत गए लेकिन इसका विकास अभी तक नही हो सका है।

अखाड़ा परिषद द्वारा वर्ष 2019 में सिद्धनाथ मन्दिर परिसर में मानव श्रृंखला निर्माण के साथ जलाभिषेक सह धरोहर सुरक्षा संकल्प यात्रा भी किया गया था ताकि सरकार की आँखे इसके विकास के लिए खुल सके।कार्यक्रम में तब राजगीर के स्थानीय विधायक रवि ज्योति, पूर्व विधान पार्षद राजू यादव सहित बिहार झारखंड के अन्य गणमान्य शामिल हुए थे।

कार्यक्रम के उपरांत हुए विधानसभा सत्र में पूर्व विधायक रवि ज्योति द्वारा सदन में सिद्धनाथ मन्दिर के विकास के लिए प्रश्न पूछा गया था जिसपर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नही दिया और पर्यटन विभाग के अधीन मामला लंबित हो गया। सिद्धनाथ मन्दिर जैसे महाभारत
कालीन धरोहर की गिरती दीवारें, जीर्ण शीर्ण होते मन्दिर के परिसर सरकारी तंत्र की उपेक्षा को दिखाने के लिए काफी है। जहां एक ओर राजगीर में विभिन्न धर्मों से जुड़े धार्मिक केंद्रों के विकास की रूपरेखा तय कर सरकार द्वारा लगातार विकास के कार्य कराए जा रहें हैं वही इस महाभारत कालीन धरोहर की उपेक्षा से सनातन धर्म प्रेमियों में काफी रोष है।

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