नालंदा में भू-माफिया कचरे के सहारे कर रहें हैं सरकारी जमीनों पर कब्जा

नालंदा रिपोर्टर | बिहारशरीफ शहर के आस-पास जमा हो रहे कूड़े के ढेर भू-माफियाओं के लिए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। नगर निगम के करीब 50 हजार घरों से प्रतिदिन 160 टन कूड़े-कचरे निकल रहे हैं, जो शहर के आसपास की सार्वजनिक जमीनों पर डैंपिंग की जा रही है।

इससे शहर समेत सीमावर्ती बिहारशरीफ, नूरसराय व रहुई के सरकारी कुल 406 आहर, पईन और तालाबों में से दर्जनों के अस्तित्व खतरें में आ गये हैं। वर्तमान में 47 वार्ड वाले नगर निगम से निकलने वाले 10 ट्रैक्टर समेत 160 टन कूड़े बड़ी पहाड़ी के पीछे, रहुई रोड, बाइपास व अन्य नदियों किनारे फेंके जा रहे हैं।

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PHOTO- GETTY IMAGES

3 एकड़ में बन रहा कूड़ा डंपिंग यार्ड

इन्हीं क्षेत्रों में से एक रहुई स्थित पंचावे नदी के किनारे कूड़े के ढेर पर बड़े-बड़े भवन और दुकान तैयार हो रहे हैं। हालाँकि नगर निगम चकरसलपुर में तीन एकड़ क्षेत्र में कूड़ा डैंपिंग यार्ड तैयार कर रहा है। वर्ष 2007 में नगर निगम अस्तित्व में आया है। तब से 23.5 किलोमीटर क्षेत्र वाले नगर निगम ने करीब तीन लाख की आबादी से सुविधा व संसाधन के नाम पर प्रतिमाह लोगों से लाखों रुपये वसूल करते हैं।

परंतु अब तक कूड़ा-कचर निष्पादन की व्यवस्था नहीं हो पायी है। इसका खामियाजा सरकारी जलस्त्रोतों और सार्वजनिक भूमि को भुगतना पड़ रहा है। दूसरी ओर सार्वजनिक व जलस्रोतों पर अवैध निर्माण होने वाले मार्गों से अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों के वाहन गुजरते हैं, बावजुद वे लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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क्या कहतें है अधिकारी

अधिकतर अधिकारी कहते हैं कि उन्हें इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। कुछ अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर अपने कार्यकाल बिताकर स्थानांतरण हो जाते हैं, इससे अतिक्रमणकारियों का दिन-ब- दिन मनोबल बढ़ता जा रहा है।

बिहारशरीफ नगर आयुक्त अंशुल अग्रवाल कहते हैं कि चकरसलपुर में कूड़ा डैंपिंग यार्ड का निर्माण कार्य चल रहा है। वर्तमान में शहर के आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में कूड़ा डैंपिंग की जा रही है। जलस्त्रोतों में कूड़ा नहीं फेंका जाता है। कूड़ा ढेर के सहारे सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करने का कोई प्रयास कर रहा है, तो उसकी जांच की जायेगी।

क्या कहते हैं सीओ

पंचाने नदी में अवैध निर्माण करने वाले मामले की जांच की जायेगी। नदी क्षेत्र को चिह्नित कर उसकी मापी कर करायी जायेगी। इसके बाद नदी क्षेत्र में भवन या दुकान का निर्माण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी । – मनोज कुमार दूबे, सीओ, रुहुई

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