गुलजार रहनेवाली मिनी सूरत के नाम से ख्यात सोहसराय कपड़ा मंडी पड़ी है सुनी

नालंदा | बिहार व झारखंड के फेरी वालों व छोटे दुकानदारों के लिए मशहूर बिहारशरीफ की सोहसराय की कपड़ा मंडी के दुकानदारों को लॉकडाउन खत्म होने के बाद ग्राहकों का इंतजार है। देर रात तक गुलजार रहने वाली मिनी सूरत के नाम से प्रसिद्ध मंडी में नाममात्र के ही ग्राहक पहुंच रहे हैं। यहां के थोक व्यापारियों का धंधा लॉकडाउन खुलने के बाद भी पिकअप नहीं पकड़ पाया है।

हर दिन 20 से 25 करोड़ का होता था कारोबार

वाहनों के आवागमन बंद रहने के कारण झारखंड से ग्राहक नहीं पहुंच पा रहे हैं। बिहार के अन्य जिलों के ग्राहक भी नहीं दिख रहे हैं। यह मंडी लॉकडाउन के बाद तीन जून को पूरी तरह खुल गयी है। इस मंडी में वर्तमान समय में करीब 400 दुकानें हैं, इन दुकानों में प्रतिदिन करोड़ों का धंधा होता था। अब मुश्किल से 30 से 35 प्रतिशत ही बिक्री हो रही है। मंडी में साड़ी की थोक दुकानें हैं।

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नोटबंदी के बाद पहली बार आई ऐसी मंदी

यहां सूरत, कोलकाता, बनारस, दिल्ली, बरेली, जयपुर आदि शहरों से साड़ियों की खेप पहुंचती है। सीजन में औसतन प्रतिदिन दो से तीन करोड़ रुपये का कारोबार होता है। जब से कोरोना फैला है, तब से इस मिनी सूरत की रौनक ही गायब हो गयी है। मंडी के थोक व्यवसायी बताते हैं कि कोरोना के भय से दूसरे प्रदेशों के कारोबारी यहां नहीं आ रहे हैं। खरीदारों की राह देखने पर दुकानदारों को बाध्य होना पड़ रहा है।

उधार का पैसा डूबने की आशंका

इस मंडी में नकद के साथ ही उधार का भी कारोबार होता है। पुराने कारोबारी यहां से उधारी में माल ले जाते हैं और एक-दो महीने में जब वे यहां पुनः खरीदारी को आते हैं तो बकाया राशि का भुगतान कर देते हैं। यह लेन-देन दुकानदार और खरीदार के विश्वास पर होता है। कोरोना के भय से बाहर के व्यापारी नहीं आ रहें हैं।

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दुकान का खर्च निकालना भी मुश्किल

व्यापारियों ने बताया कि ग्राहकों के नहीं आने से दुकान का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किराया, बिजली बिल, स्टाफ के वेतन की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। कुछ दुकानदारों को कई दिनों तक बोहनी भी नहीं हो पाती है। स्थानीय कुछ खरीदार ही शादी- ब्याह को लेकर कपड़े की खरीदारी को आ रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट वाले वसूल रहे कोरोना टैक्स

सोहसराय कपड़ा कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रदुमन कुमार, सचिव राजेश कुमार, सलाहकार अनिल खत्री आदि ने बताया कि इधर ट्रांसपोर्ट वाले भी बदमाशी कर रहे हैं। कपड़ा व्यवसायियों से माल भाड़े में 400 रुपये कोरोना टैक्स जोड़कर लिया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट वाले पहले पैसा जमा करा लेते हैं, तब माल देते हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति ऐसी है कि पहले व्यापार एक रुपया का होता था, अब केवल 10-15 पैसे का व्यवसाय हो रहा है।

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